लिंगाष्टकम् / Lingashtakam
प्रिय स्नेही मित्रों जय श्रीकृष्णा, राधे राधे.....
शिवलिंग के रूप में भगवान शिव की स्तुति आठ श्लोकों में किए जाने के कारण लिंगाष्टकम् कहा गया है। लिंगाष्टकम् के आठ श्लोकोंं मेंं भगवान शिव की बहुत मनोहारी, व लयवद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। भगवान शिव का सभी दुःखो को दूर करने वाला तथा सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाले के रूप में भाव सहित वन्दना की गयी है।
ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिगं, निर्मलभाषितशोभित लिंगं।
जन्मजदुःखविनाशक लिंग तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥१।।
मैं उन भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिनकी ब्रह्मा, विष्णु एवं देवताओं द्वारा पूजा, अर्चना की जाती है, जो सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पूजित हैं तथा जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करते हुए मोक्ष प्रदान करता है।
देवमुनिप्रवरार्चित लिंगं, कामदहं करुणाकर लिंगं।।
रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥२।।
देवताओं और मुनियों के द्वारा पूजा किए जाने वाले लिंग, जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं शिव का स्वरूप है, जिसने रावण के अभिमान का भी नाश किया, उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।
लिंगाष्टकम् / Lingashtakam
सर्वसुगंन्धिसुलेपित लिंगं, बुद्धिविवर्धनकारण लिंगं।।
सिद्धसुरासुरवन्दित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥३।।
सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा लेप किए जाने वाले लिंग, जो कि बुद्धि का विकास करने वाला है तथा, सिद्ध- सुर आदि देवताओं एवं असुरों आदि सभी के लिए वन्दनीय है, उन भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ।
कनकमहामणिभूषित लिंगं, फणिपतिवेष्टितशोभित लिंगं।
दक्षसुयज्ञविनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥४।।
स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित, एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाल है ; उन भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ।
लिंगाष्टकम् / Lingashtakam
कुंकुमचंदनलेपित लिंगं, पंङ्कजहारसुशोभित लिंगं।।
संञ्चितपापविनाशिन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥५।।
कुंकुम एवं चन्दन से शोभायमान, कमल हार से शुसोभित भगवान सदाशिव लिंग जो कि सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाले हैंं, उन भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ।
देवगणार्चितसेवित लिंग, भावैर्भक्तिभिरेवच लिंगं।।
दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥६।।
आप भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जो कि सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों द्वारा पूजनीय हैंं तथा जो करोडों सूर्य के सामान प्रकाशमान हैं।
अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भवकारण लिंगं।
अष्टदरिद्रविनाशित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥७।।
आठों दलों में मान्य, एवं आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले भगवान सदाशिव लिंग सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैं – आप भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ।
सुरगुरूसुरवरपूजित लिंगं, सुरवनपुष्पसदार्चित लिंगं।
परात्परं परमात्मक लिंगं, ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं।।८।।
देवताओं एवं देव गुरूओं द्वारा स्वर्ग - वाटिका के पुष्पों से पूजनीय परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे हैंं – उन भगवान सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ।
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आपका अपना - पं0 रमाकान्त मिश्र
कोइरीपुर, सुलतानपर




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