रुद्राष्टकम्/Rudrashatakam

 रुद्राष्टकम्/Rudrashatakam


प्रिय स्नेही मित्रों जय श्रीकृष्णा, राधे राधे.....

   
       
        रुद्राष्टकम् के पाठ करने शिवजी की कृपा सदैव बनी रहती है। बडे से बडे शिव श्राप से मुक्त हुआ जा सकता है। इसी रुद्राष्टकम् स्तोत्र के पाठ से गरुण जी को शिव के श्राप से गरुण जी के गुरू ने मुक्त कराया था।
       नमामीशमीशान    निर्वाणरूपं
       विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
       निजं  निर्गुणं  निर्विकल्पं निरीहं
       चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम।।

            भगवन ईशान को मेरा प्रणाम है, ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान ॐकार के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो निष्पक्ष हैं जिनका आकर आकाश के सामान हैं जिसे मापा नहीं जा सकता ऐसे भगवान शिव की मै प्रार्थना करता हूँ।

रुद्राष्टकम्/Rudrashatakam

       निराकारमोङ्कारमूल     तुरीयं
       गिराज्ञानगोतीतमीशं  गिरीशम्।
       करालं  महाकालकालं कृपालं
       गुणागारसंसारपारं      नतोहम


        जिनका कोई आकार नहीं, ॐ के मूल हैं, कोई राज्य नहीं, जो गिरी के वासी हैं, जो  सभी ज्ञान, शब्द से परे हैं, जो कैलाश के स्वामी हैं, जिनका रूप भयावह हैं, जो काल के स्वामी हैं, जो उदार एवम् दयालु हैं, जो गुणों के खजाना हैं, जो संसार के परे हैं उनके सामने मैं नत मस्तक होता हूँ।

रुद्राष्टकम्/Rudrashatakam

       तुषाराद्रिसंकाशगौरं          गभीरं
       मनोभूतकोटिप्रभाश्री     शरीरम्।
       स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
       लसद्भालबालेन्दु   कण्ठे   भुजङ्गा।।


             जो बर्फ के समान शीतल हैं, जिनका मुख सुंदर हैं, जो गौर रंग के हैं जो गहन चिंतन में हैं, जो सभी प्राणियों के मन में हैं, जिनका वैभव अपार हैं, जिनका शरीर सुंदर हैं, जिनके मस्तक पर तेज हैं जिनकी जटाओ में लहराती हुई गंगाजी विराजमान हैं, जिनके चमकते हुए मस्तक पर चाँद स्थित हैं, और जिनके कंठ पर सर्प का वास हैं।

       चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
       प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
       मृगाधीशचर्माम्बरं   मुण्डमालं
       प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि।।


          जिनके कानों में बालियाँ हैं, जो सुन्दर भौंंहे और बड़ी-बड़ी आँखों वाले हैं जिनके चेहरे पर सुख का भाव हैं जिनके कंठ में विष का वास हैं जो दयालु हैं, जो शेर की खाल धारण किए हुए हैं, जिनके गले में मुंड की माला हैं ऐसे प्रिय शिव जी समस्त संसार के नाथ को मैं सदैैैव भजता हूँ।

       प्रचण्डं  प्रकृष्टं  प्रगल्भं   परेशं
       अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
       त्र्यःशूलनिर्मूलनं       शूलपाणिं
       भजेहं  भवानीपतिं  भावगम्यम।।


            जो भयंकर हैं, जो परिपक्व साहसी हैं, जो श्रेष्ठ हैं, अखंड है, जो अजन्मे हैं, जो सहस्त्र सूर्य के समान प्रकाशवान हैं, जो त्रिशूल धारण किए हुए हैं, जिनका कोई मूल नहीं हैं, जिनमे किसी भी मूल का नाश करने की शक्ति हैं ऐसे त्रिशूल धारी माँ भगवती के पति जो प्रेम से जीते जा सकते हैं उनकी मैं भाव सहित प्रणाम करता हूँ।

(आपका प्रिय लेख "रोगनिवारण सूत्र" तथा "सिद्ध कुंजिका स्तोत्र विशेष" अवश्य पढें। लेख पसंद आए तो कमेण्ट बाक्स में अपनी राय अवश्य दें शेयर भी जरूर करें।)

       कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
       सदा    सज्जनानन्ददाता  पुरारी।
       चिदानन्दसंदोह         मोहापहारी
       प्रसीद   प्रसीद   प्रभो   मन्मथारी।।


      जो काल के बंधे नहीं हैं, जो कल्याणकारी हैं, जो विनाशक भी हैं,जो हमेशा आशीर्वाद देते है और धर्म का साथ देते हैं , जो अधर्मी का नाश करते हैं, जो चित्त का आनंद हैं, जो जूनून हैं जो मुझसे खुश रहे ऐसे भगवान जो कामदेव नाशी हैं उन्हें मेरा प्रणाम है।

      न   यावद्   उमानाथपादारविन्दं
      भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
      न  तावत्सुखं शान्ति  सन्तापनाशं
      प्रसीद   प्रभो     सर्वभूताधिवासं।।


            जो यथावत नहीं हैं, ऐसे उमा पति के चरणों में कमल वन्दन करता हैं ऐसे भगवान को पूरे लोक के नर नारी पूजते हैं, जो सुख हैं, शांति हैं, जो सारे दुखो का नाश करते हैं जो सभी जगह वास करते हैं।

       न जानामि योगं जपं नैव पूजां
       नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्।
       जराजन्मदुःखौघ   तातप्यमानं
       प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।


          मैं कुछ नहीं जानता, ना योग , ना ध्यान हैं देव के सामने मेरा मस्तक झुकता हैं, सभी संसारिक कष्टों, दुःख दर्द से मेरी रक्षा करे. मेरी बुढ़ापे के कष्टों से से रक्षा करें | मैं सदा ऐसे शिव शम्भु को प्रणाम करता हूँ।

            ॐ नमः शिवाय 

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आपका अपना - पं0 रमाकान्त मिश्र
                   कोइरीपुर, सुलतानपर
                  9450213496
                  8299722413

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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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